What Is Protoplasm : Protoplasm Meaning In Hindi

Protoplasm एक रंगहीन, चिपचिपा, जेलीनुमा (jelly like), श्लेषी (gelatinous) पदार्थ है। जीवद्रव्य की खोज सर्वप्रथम डुजारडिन (Dujardin) ने 1835 में की।

What is Protoplasm ( जीवद्रव्य क्या है ?)

हक्सले (Huxley) ने जीवद्रव्य (protoplasm) को जीवन का भौतिक आधार (physical basis of life) कहा ।

Who Discovered Protolasm

जीवद्रव्य की खोज सर्वप्रथम डुजारडिन (Dujardin) ने 1835 में की तथा इसको सारकोड (sarcode) नाम दिया। पुरकिंजे (Purkinje) ने सर्वप्रथम इसे प्रोटोप्लाज्म (protoplasm) नाम दिया। वान मॉल (Von Mohl) ने 1864 में पादप कोशिका में इसे देखा और इसके महत्त्व को बताया।

प्रोटोप्लाज्म के दो मुख्य भाग हैं :

  1. कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm)
  2. केन्द्रक (Nucleus)

जीवद्रव्य के भौतिक लक्षण (Physical Characters of Protoplasm )

यह एक रंगहीन, चिपचिपा, जेलीनुमा (jelly like), श्लेषी (gelatinous) पदार्थ है। यह कणिकामय (granular), लचीला (elastic), चिपचिपा (viscous) होता है। इसे धागे के समान खींचा जा सकता है जो प्रत्यास्थ (elastic) होने के कारण छोड़ने पर वापस अपने स्थान पर आ जाता है। इसमें विभिन्न प्रकार की रसधानियाँ (vacuoles) मिलती हैं। जिसके कारण यह फेनयुक्त दिखाई पड़ता है। उत्तेजनशीलता (stimulation) तथा उसके प्रति अनुक्रिया (response) प्रोटोप्लाज्म का अभिलक्षणीय लक्षण (characteristic feature) है। यह अर्धपारदर्शी (transluscent) होता है।

जीवद्रव्य एक कोलॉयडी तन्त्र (colloidal system) है। कोलॉयडी तन्त्र में विलायक तथा विलेय के कणों को अलग नहीं किया जा सकता है। प्रोटोप्लाज्म एक बहुकलीय (polyphasic) कोलॉयडी तन्त्र है। कोलॉयडी घोल असमांगी (heterogeneous) होता है। यह दो कलाओं (phases) का बना होता है

(1) सतत कला (continuous phase) अथवा परिक्षेपण माध्यम (dispersion medium) अवस्था में माध्यम सतत अविरत रहता है, जैसे विलायक (solvent )

(2) असतत कला (discontinuous अथवा परिक्षिप्त प्रावस्था (dispersed phase), जैसे विलेय (solute)

परिक्षेपण माध्यम (dispersion medium) में वस्तु वितरित रहती है। उस वस्तु को परिक्षिप्त प्रावस्था (dispersed phase) कहते हैं। जीवद्रव्य निलम्बन (suspension) एवं पायस (emulsion) का मिश्रण है। जिसमें प्रोटीन का विलेय निलम्बन बनाता है तथा वसा की बूँदें पायस बनाती हैं। इस प्रकार की अवस्था जलरागी (hydrophilic) कोलॉयड है।

कोलॉयडी तन्त्र की दो अवस्थाएँ होती हैं।

(1) सॉल (Sol)

यह तरल होता है। इसमें विलायक की मात्रा विलेय से अधिक होती है। यदि विलायक जल (water) हो तो सॉल जलरागी (hydrophilic sol) अन्यथा जल विरोधी (hydrophobic) होता है।

(2) जैल (Gel)

इसमें विलेय की मात्रा, विलायक से बहुत अधिक होती है। इस अवस्था में यह अर्द्धठोस (semisolid) होता है।

परिस्थितियों के अनुरूप सॉल जैल में तथा जैल सॉल में परिवर्तनीय है।

Sol<======>Gel

प्रोटोप्लाज्म ( Protoplasm ) के अन्य मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं :

(i) विस्कासिटी (Viscosity)

(ii) प्रत्यास्थता (Elasticity)

(iii) टिण्डल परिघटना (Tyndall phenomenon) : कोलॉयडी कणों से टकराकर प्रकाश की किरणों के विवर्तन (diffraction) या प्रकीर्णन (scattering) को टिण्डल परिघटना (Tyndall phenomenon) कहते हैं।

(iv) संसजकता (Cohesiveness) : अणु तथा कणों का समूह कोलॉयडी तन्त्र का लक्षण है। (v) ब्राउनियन गति (Brownian movement) : कोलॉयडी तन्त्र में अणुओं के टकराने (bombardment) से अणु 'Z'(zig zag) गति दिखाते हैं। इसका सर्वप्रथम प्रदर्शन रॉबर्ट ब्राउन ने 1829 में किया और इस प्रकार की आण्विक गति को ब्राउनियन गति का नाम दिया।

(vi) विद्युतकीय लक्षण (Electrical properties) : प्रोटोप्लाज्म वैद्युत उदासीन (electrically neutral) होता है।

जीवद्रव्य की प्रकृति Nature of Protoplasm

(अ) जालिका सिद्धान्त (Reticular theory)

यह सिद्धान्त हेन्सटीन (Hanstein), रिन्के (Reinke) आदि ने दिया। उनके अनुसार जीवद्रव्य जालिकामय (reticulate) होता है।

(ब) दानेदार सिद्धान्त (Granular theory)

आल्टमेन (Altmann) ने 1893 में बताया कि जीवद्रव्य दानेदार (granular) होता है।

(स) कूपिका सिद्धान्त (Alveolar theory)

यह सिद्धान्त बुशेली (Butschilli) ने 1892 में दिया। इनके अनुसार जीवद्रव्य पायस (emulsion) है जिसमें छोटी बूँदें (droplets) तथा कूपिकाएँ (alveoli) बिखरे रहते हैं। यह विचार आधुनिक विचारधारा से मिलता-जुलता है।

(द) तन्तुमय सिद्धान्त (Fibrillar theory)

इस सिद्धान्त के अनुसार जीवद्रव्य तन्तुमय (fibrillar) होता है। यह सिद्धान्त फ्लेमिंग (Flemming) ने दिया था।

जीवद्रव्य की गतियाँ (Movements of Protoplasm)

जीवद्रव्य में तीन प्रकार की गतियाँ होती हैं

1. जीवद्रव्य भ्रमण (Cyclosis)

इसमें प्रोटोप्लाज्म में गति कोशिका भित्ति के अन्दर ही होती है। यह दो प्रकार की होती है :

(अ) घूर्णन (Rotation) : इसमें जीवद्रव्य रसधानी ( vacuole ) के चारों ओर दक्षिणावर्त (clockwise) अथवा वामावर्त (anticlockwise) घूमता है।

(ब) परिसंचरण (Circulation) : जीवद्रव्य रसधानी के चारों ओर विभिन्न दिशाओं में घूमता है।

2. पक्ष्माभिकीय गति (Ciliary movement )

यह गति कशाभिका (flagellum) अथवा पक्ष्माभिका (cilium) द्वारा होती है। यह संरचनाएँ कोशिका से बाहर होती हैं। इनकी गति का नियन्त्रण कोशिका के भीतर स्थित आधारकाय (basal body) से होता है।

3. अमीबीय गति (Amoeboid movements)

जीवद्रव्य कूटपाद (pseudopodia) के द्वारा गति करता है, जैसे अमीबा (Amoeba) में।

जीवद्रव्य का रासायनिक संघटन (Chemical Composition of Protoplasm)

1. जल (Water)

जीवद्रव्य में 85% जल होता है। जलीय वनस्पति में 95% तक जल पाया जाता है। परन्तु निष्क्रिय (non-functional) अवस्था में, जैसे सूखे बीजों (dry seeds) में यह लगभग 10% होता है।

2. प्रोटीन (Protein)

जीवद्रव्य में यह ठोस पदार्थों के शुष्क भार का 60-65% होता है। यह जीवन के लिए एक प्रमुख तथा अतिमहत्त्वपूर्ण पदार्थ है। इसकी संरचना में C, H, N, O तथा S आदि पाए जाते हैं। प्रोटीन के अणु जटिल होते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्ल के परस्पर जुड़ने से बनी श्रृंखला है। पौधों का सरल प्रोटीन लगभग 100 अमीनो अम्ल अणुओं के मिलने से बनता है। अमीनो अम्ल उभयधर्मी (amphoteric) अर्थात् अम्लीय (-) तथा क्षारीय (+) आवेशयुक्त होते हैं। ये सामान्यतः 20 प्रकार के होते हैं। इनके संघनन (condensation) से विभिन्न प्रकार के प्रोटीन बनते हैं। कुछ प्रोटीनों का आण्विक भार (mol. wt) 5,00,000 डाल्टन तक होता है। गेहूँ से प्राप्त ग्लायडीन ( gliadin) का आण्विक सूत्र (molecular formula) C685 H1068 o211 S5 होता है। प्रोटीन की संरचना चार प्रकार की होती हैं, प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक तथा चतुर्थक प्रकार की संरचना ।

जीवद्रव्य में होने वाली असंख्य उपापचयी क्रियाओं के लिए महत्त्वपूर्ण विकर (enzymes) भी प्रोटीन ही हैं। इनमें विशेष सक्रिय स्थल (active site) होते हैं।

3. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)

ये C, H, O के यौगिक हैं। सामान्यतः हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन का अनुपात 2:1 होता है। इसका आण्विक सूत्र (CH2O) है। ये तीन प्रकार के होते हैं :

(i) मोनोसैकेराइड्स (Monosaccharides) : जैसे—ग्लूकोज (glucose), फ्रक्टोज (fructose) आदि। (ii) ओलिगोसैकेराइड्स (Oligosaccharides) : ये दो से दस मोनोसैकेराइड के मिलने से बनते हैं; जैसे—माल्टोज (maltose), सुक्रोज (sucrose) आदि।
(iii) पॉलिसैकेराइड्स (Polysaccharides) : ये अनेक मोनोसैकेराइड (10 से अधिक) से मिलकर बनते हैं; जैसे— सेलुलोस (cellulose), मण्ड (starch) आदि।

4. लिपिड (Lipid)

जीवद्रव्य की रचना में महत्त्वपूर्ण वसा या लिपिड ऊर्जा के प्रति उत्तरदायी होती है। यह C, H, O से बने होते हैं। इनमें O की मात्रा कम होती है। कुछ लिपिड में N तथा P भी मिलते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं :
(i) शुद्ध वसा (True fats) : ये ग्लिसरॉल तथा वसा अम्ल (glycerol and fatty acids) से बनते हैं। (ii) मोम (Wax) : यह वसा अम्ल (fatty acids) की बहुत लम्बी श्रृंखला है जो 24-36 कार्बन, परमाणुओं (atom) की बनी होती है; जैसे—क्यूटिन, सुबेरिन आदि (iii) फॉस्फोलिपिड (Phospholipid) : यह ग्लिसरोल, वसा अम्ल, फॉस्फोरिक अम्ल तथा नाइट्रोजनी क्षार आदि से बनता है

5. अकार्बनिक पदार्थ (Inorganic substances)

अकार्बनिक पदार्थ सामान्यतः पानी में घुले हुए तथा आयनिक अवस्था में होते हैं; जैसे—धनायन (cations) हैं : Ca++, K+, Mg+ +, Fe ++ + आदि तथा ऋणायन (anions) हैं : NO3-, Cl-, PO4-- , SO4--", HCO3- आदि।

6. न्यूक्लीक अम्ल (Nucleic acid)

ये बड़े कार्बनिक अणु हैं तथा C, H, N, S तथा P के बने होते हैं इनके दो प्रकार हैं
(i) डीऑक्सी राइबोन्यूक्लीक अम्ल (DNA) तथा (ii) राइबोन्यूक्लीक अम्ल (RNA)
प्रत्येक न्यूक्लीक अम्ल 3 घटकों का बना होता है
(a) नाइट्रोजनी क्षार (Nitrogenous base), (b) पेन्टोस शर्करा (Pentose sugar) तथा (c) फॉस्फोरिक अम्ल (Phosphoric acid)

7. अन्य पदार्थ (Other substances)

जीवद्रव्य में पाए जाने वाले अन्य पदार्थ निम्नलिखित हैं

(i) वर्णक (Pigments), (ii) हॉर्मोन (Hormones), (iii) विकर (Enzymes), (iv) लेटेक्स (Latex), (v) ऐल्केलॉइड (Alkaloids), (vi) वृद्धि नियन्त्रक (Growth regulators) (पौधों में) तथा (vii) विटामिन (Vitamins) आदि। कोशिका का औसतन pH-7 होता है परन्तु समय-समय पर यह 5.2-8.5 तक बदलता रहता है।

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