सामाजिक परिवर्तन के लिए शिक्षा का महत्व और शिक्षा के कार्य

शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त साधन माना गया है,समाज में शिक्षा की व्यवस्था को इसलिए सुदृढ़ बनाया है ताकि आपेक्षिक परिवर्तन लाया जा सके।

सामाजिक परिवर्तन लाने के लिए शिक्षा का महत्व (Importance of education in the field of social change)

शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त साधन माना गया है समाज में शिक्षा की व्यवस्था को इसलिए सुदृढ़ बनाया है ताकि आपेक्षिक परिवर्तन लाया जा सके इन परिवर्तनों हेतु शिक्षा के कई उपाय निम्नलिखित रूप में प्रयोग किए जाते हैं।

1 शिक्षा मानव के व्यवहार जीवन शैली विचार तथा आदतों एवं चिंतन शक्ति में परिवर्तन लाती है तथा उन्हें वांछित दिशा में मोड़ सामाजिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है।

2 शिक्षा समाज की संस्कृति का हस्तांतरण है परिमार्जन तथा चयन करके सांस्कृतिक परिवर्तन लाती है सांस्कृतिक परिवर्तन के फल स्वरुप ही सामाजिक परिवर्तन होता है।

3 शिक्षा समाज में व्याप्त बुराइयों तथा कुरीतियों के बारे में जनसाधारण को अवगत कराकर उनके विरुद्ध जनमत का निर्माण करती है उस जन्नत के द्वारा ही व्याप्त कुरीतियां तथा बुराइयां दूर होती हैं।

4 शिक्षा व्यक्तियों के दृष्टिकोण हो को व्यापक एवं उदार बनाती है ताकि वे  नवीनताओं को निसंकोच स्वीकार कर सकें।

5 अंधविश्वासों तथा धार्मिक रूढ़ियों का अंधानुशरण करने से शिक्षा बचाती है , उसे सही दिशा में सोचने एवं वैज्ञानिक ढंग से चिंतन व विश्लेषण करने हेतु प्रेरित करती हैं।

6 शिक्षा द्वारा वैज्ञानिक प्रगति होती है नए अविष्कार होते हैं फल स्वरुप सामाजिक परिवर्तन दृष्टिगोचर होता है।

7 शिक्षा समाज की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है इस आर्थिक प्रगति के फल स्वरुप सामाजिक परिवर्तन दृष्टिगोचर होता है।

8 सामाजिक परिवर्तन के मार्ग में जो बाधाएं हैं शिक्षा उन बाधाओं को दूर करके परिवर्तन की गति को तीव्रता प्रदान करती है। 

9 सामाजिक परिवर्तनों है तो सामाजिक कार्यकर्ताओं का निर्माण कर सामाजिक नवचेतना समाज सेवा एवं जनसाधारण का उत्तरदायित्व सौपती  है।

10 शिक्षा द्वारा जनमानस का दृष्टिकोण ज्ञान भंडार द्वारा विकसित होता है तथा आचार विचार बदलते हैं।

11 शिक्षा द्वारा व्यक्तियों की संकीर्ण  भावनाएं दूर होती हैं वह परस्पर सहयोग की भावना से रहना सीखते हैं तथा व्यापक राष्ट्रीय व सामाजिक कल्याण की भावना को दृष्टिगत रखते हुए कार्य करते हैं।

उदाहरणार्थ जातिवाद, प्रांतीयता, तथा क्षेत्रीयता या विवाद के सम्बंध में राष्ट्रीय एकता का पास बढ़या जा सकता है।

12 शिक्षा समाज के शाश्वत मूल्यों की रक्षा कर समाज को अवनति के पथ पर जाने से रोकती है।

13 शिक्षा समाज में हो रहे परिवर्तनों की समीक्षा मूल्यांकन तथा समालोचना कर परिवर्तनों की गति को तीव्र करती है तथा उन्हें उपेक्षित दिशा प्रदान करती हैं।

इस प्रकार हम देखते हैं कि सामाजिक परिवर्तन लाने के लिए शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन करना पड़ेगा ताकि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से हो सके इसके लिए शिक्षा द्वारा निम्नलिखित कार्य करने होंगे।

सामाजिक परिवर्तन के लिए शिक्षा के कार्य (Functions of education for social change)

सामाजिक मूल्यों का निर्माण

सामाजिक परिवर्तनों के लिए जिस शिक्षा की व्यवस्था की जाए वह ऐसी हो जो समाज की संस्कृति का परिमार्जन कर सकें संस्कृति में व्याप्त बुराइयां दूर हो सके और उन मूल्यों का चयन हो सके जो समय के अनुकूल हैं तथा उपयोगी हैं शिक्षा का यह उद्देश्य भी होना चाहिए जो वर्तमान संदर्भ में नए नए मूल्यों का निर्माण कर समाज को उचित दिशा प्रदान कर सकें।

परिवर्तन हेतु प्रेरणा

शिक्षा के समुचित व्यवस्था परिवर्तन हेतु प्रेरणा का साधन होती है एक कल्याणकारी एवं अस्तित्व वाले समाज के लिए शिक्षा की महती आवश्यकता है जब समाज परिवर्तन के आवश्यकता की अनुभूति कर लेता है तो परिवर्तन लाना सहज एवं तीव्र हो जाता है अतः शिक्षा में भी ऐसे परिवर्तन एवं परिवर्धन करने होंगे जो उसके (समाज) परिवर्तन के अनुकूल सहायक सिद्ध हो।

वैज्ञानिक प्रगति का ज्ञान राष्ट्र तथा अंतरराष्ट्रीय जगत में वैज्ञानिक क्षेत्र में घटित घटनाओं का ज्ञान तथा उनकी प्रगति का ज्ञान व्यक्ति को नए आविष्कार तथा खोजों से होता है इस नवीनता के आधार पर व्यक्ति अपने अंधविश्वासों व रूढ़ियों का विश्लेषण करता है ताकि समाज की कुप्रथा एवं रूढ़ियां तथा अन्य कुरीतियां समाप्त हो सके और आधुनिकीकरण की ओर अग्रसर हो सके।

जन जागरण हेतु

शिक्षा जनमानस में चैतन्यता या जागरण करने हेतु एक साधन है व्यक्ति को चैतन्य व जागरूक बनाया जाता है कि वह विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर प्रगति कर सकें एवं इस उन्नत के साथ शाश्वत मूल्यों की  भी रक्षा कर सकें।

सामाजिक शिक्षा का विकास

आज सामाजिक परिवर्तन हेतु इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है जो कि समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं बुराइयों को दूर कर स्वस्थ परंपराओं एवं रीतियों और नीतियों और समाज का ध्यान आकर्षित करें।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण शिक्षा सामाजिक कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण प्रदान कर परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करने वाली हो शिक्षा व्यवस्था में यह आवश्यकता है कि कुछ चुने हुए व्यक्तियों को सामाजिक कर्ताओं के रूप में प्रशिक्षित किया जाए इस प्रकार शिक्षा सामाजिक नेतृत्व करने वाली होनी चाहिए।

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